An online Muslim photo & wallpapers. Islamic wallpapers, latest news & updates.
Islamic Wallpapers
Allah Wallpaper
Allah Wallpaper
Filed under: Hindi News — admin     4:04 pm March 30, 2011

पिछले पांच वर्षों में पहली बार वेतनभोगियों की वास्तविक आय कम हुई है। 2010 में खत्म हुए वित्त वर्ष में उपभोक्ता मुद्रास्फीति उनकी आय में हुई वृद्धि से ज्यादा थी। देश के आर्थिक विकास के लिए यह अच्छा नहीं है। ईटीआईजी के एक सर्वे के मुताबिक इस बीच उपभोक्ता की सोच और खर्च करने के ढंग में भी बदलाव आया है। आर्थिक विकास के लिए जरूरी कई बातों में यह भी एक अहम पहलू है। लेकिन अगर महंगाई बढ़ती है और उसी अनुपात में उपभोक्ता की आय नहीं बढ़ती है , तो उसकी खरीदारी करने की क्षमता कम होगी। इससे देश की समूची खपत में कमी आएगी और विकास की गति धीमी होगी। एनसीएईआर के मुताबिक ‘ जब भी मुद्रास्फीति एक सीमा से ज्यादा बढ़ जाती है और कुछ समय तक उसी ऊंचाई पर बनी रहती है , तो खपत में और नए निवेश में कमी आने लगती है और इससे विकास दर में कमी की आशंका हो जाती है। ‘

आय की असलियत
छठे वेतन आयोग के अनुसार सरकारी कर्मचारियों की आय में 16.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। उस दौरान प्राइवेट कंपनियों द्वारा भी वेतन में अच्छी बढ़ोतरी की गई थी। इससे वर्ष 2008-09 में वेतन में वृद्धि की दर अपने चरम उत्कर्ष पर थी और इस साल उपभोक्ता मुद्रास्फीति के औसतन 9.1 प्रतिशत पर रहने के बावजूद एक औसत वेतनभोगी की आय में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। लेकिन वर्ष 2009-10 में औसत आय में वृद्धि गिरकर 8.4 प्रतिशत हो गई थी जो पिछले पांच सालों में सबसे कम थी। उसके बाद वेतनभोगी को एक और झटका लगा , क्योंकि इस वर्ष उपभोक्ता मुद्रास्फीति औसतन 12.3 प्रतिशत पर रही। कई एचआर कंसलटेंट्स के अनुसार वर्ष 2010-11 के पहले 9 महीने में अर्थात अप्रैल से दिसंबर 2010 तक एक वेतनभोगी की औसत आय में वृद्धि तकरीबन 11 प्रतिशत रही है। अगर यही प्रतिशत हम पूरे साल 2010-11 के लिए मान लें , तो भी मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए उस वेतनभोगी की वास्तविक आय या तो बिल्कुल नहीं बढ़ी होगी या पहले से भी कम हो गई होगी।

कर्ज पर ऐश कब तक
आईआईएम अहमदाबाद के प्रफेसर अरविंद सहाय की चिंता है कि क्या इस स्थिति में भी हिंदुस्तान के उपभोक्ता अमेरिकन स्टाइल में अपना कंजंप्शन बढ़ाते रहेंगे ? वर्ष 2008 तक उनका रवैया ऐसा ही था। यानी अभी खरीदो , उपयोग करो , पैसे बाद में देते रहेंगे। लेकिन क्या वास्तविक आय में कमी के बावजूद क्या कर्मचारियों का व्यवहार वेसा ही बना रहेगा ? अभी तक कुछ निश्चित वस्तुओं के उपभोग और मांग में वृद्धि हुई है। दूध और दूध से बनी वस्तुएं , दलहन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स अर्थात फ्रिज , टीवी , वाशिंग मशीन आदि के उपभोग और मांग में उपभोक्ता ने वास्तविक आय में कमी को नजरअंदाज किया है।

मध्य पूर्व की राजनीतिक अस्थिरता अगर लंबे समय तक चली तो यह निश्चित है कि इसका प्रभाव कच्चे तेल की कीमत पर पड़ेगा। जापान के न्यूक्लियर रिएक्टर में हुए रेडिएशन से इसमें और वृद्धि के आसार हैं। कई न्यूक्लियर रिएक्टर बंद कर दिए गए या उनमें तकनीकी सुधार किया जा रहा है। यानी विश्व बाजार में तेल की कीमतों में उफान और मुद्रास्फीति में इसका प्रभाव आना लगभग तय है। अभी हाल में रिलीज हुए सीआईआई के बिजनेस आउटलुक सर्वे के अनुसार भारत का बजट घाटा बढ़ना और उपभोक्ता मांगों में आ रही कमी आने वाले समय में व्यापार और विकास के लिए चिंता का विषय बनेगा।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के रिसर्च विंग के रीजनल हेड समीरन चक्रवर्ती का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में हिंदुस्तान के उपभोक्ता की आय में वृद्धि ने उसे उच्च मुद्रास्फीति को काफी हद तक सह ले जाने की क्षमता प्रदान की है। लेकिन ईटीआईजी के अनुसार 2005 से 2009 मार्च तक वास्तविक आय में वृद्धि लगभग 7.4 प्रतिशत और प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों में लगभग 8 प्रतिशत रही है। वेतन वृद्धि के बारे में यह सर्वे तकरीबन चार सौ बड़े संस्थानों में किया गया , जिनमें आधे पब्लिक सेक्टर और आधे प्राइवेट सेक्टर के थे। उनके यहां कर्मचारियों की संख्या तकरीबन 20 लाख है।

पिछले पांच वर्षों में वेतनधारियों की वास्तविक आय ऊंची बनी रहने के कारण रोजमर्रा की चीजों जैसे टेलिफोन , इंटरनेट , पार्लर , कुरियर सर्विस , ऑटोमोबाइल्स , इलेक्ट्रॉनिक आइटम और घरेलू उपयोग की वस्तुओं में उपभोक्ताओं की अपनी रुचि के अनुसार खरीदारी की क्षमता बनी रही। पैसेंजर गाडि़यों की मांग में पिछले पांच वर्षों में 10 प्रतिशत के हिसाब से वृद्धि होती रही , जो कि 2009 में आकर स्थिर हो गई। इसका कारण ऊंची ब्याज दर और 2009 में धीमी आर्थिक विकास का डर भी था। पिछले 12 महीनों में इन गाड़ियों की मांग बनी रही , फिर भी आने वाले समय में ऊंची ब्याज दर और मुद्रास्फीति उपभोक्ताओं को अपनी जरूरतें घटाने को बाध्य कर सकती है।

दुष्चक्र के संकेत
फरवरी 2011 के अंत में फिक्की ने अपनी एक सर्वे रिपोर्ट जारी की थी , जिसमें पता चला था कि 70 प्रतिशत उद्योग अपने बढ़ते वेतन खर्च से परेशान हैं। कच्चे माल की कीमतों के बाद जो दूसरी सबसे ज्यादा परेशानी का कारण इंडस्ट्री के लिए वेतन वृद्धि ही है। पिछले महीने ब्राजील की नवनिर्वाचित राष्ट्रपति से वहां की ट्रेड यूनियनों ने मुद्रास्फीति के अनुसार न्यूनतम मजदूरी में तय सीमा से ज्यादा बढ़ोतरी की मांग की थी। चीन में मुद्रास्फीति वहां की सरकार के अनुसार 5 प्रतिशत होनी चाहिए , लेकिन इसके निर्धारित सीमा से ज्यादा होने के चलते उसके बहुत सारे राज्यों में न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाना पड़ा है। यह उभरते बाजार वाले देशों में वेतन और मुद्रास्फीति का दुष्चक्र बनने का संकेत है।

औसत वेतन में वृद्धि
2005-2006 13.2%
2006-2007 15.7 %
2007-2008 10.2%
2008-2009 16.9%
2009-2010 8.4%

वास्तविक आय में वृद्धि
2005-2006 8.6%
2006-2007 9%
2007-2008 4%
2008-2009 7.8%
2009-2010 (-)3.9 %

Source : नवभारत टाइम्स

No Comments »

No comments yet.

RSS feed for comments on this post. TrackBack URL

Leave a comment


Islamic Wallpapers
We are Hiring
Join Community, Make Friends
Latest News
Urdu News
Hindi News
Kalima Shahada mentioned in Quran
Stories of Sahabah
Popular Quran Quotes
Random 40 Hadith
Modern Muslim Women & Challenges
Marriage & family in Islam
Muslim Women World
Health, Beauty and Islam
Latest Posts
Muslim Women Rights In Islam
Random Photo
  • An American Muslim Girl
Share
Bookmark and Share
Sponsored Links
  1. Surat Web Design
  2. Web Desgin Company
  3. Hindu Blog
Most Popular Video
Facebook Like
Recent Comment
About Muslim Wallpapers
Islamic Blog provides information about latest Islamic News and updates. The website also contains large number of Islamic wallpapers and photos. You can also get here Islamic knowledge. We have also collected information about latest and relevant Islamic subjects. Apart from this you can find glittering stories off Sahabah.
Copyright © 2003-2010 islamicblog.co.in All Rights Reserved.
POWERED BY : SUHANASOFT