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Filed under: Hindi News — admin     5:24 pm June 23, 2011

क्रेडिट और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल के मामले में चूक होने की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। किसी भी यूजर को होटल, मॉल, शॉप सहित दूसरे सभी ऑनलाइन या ऑफलाइन पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) पर लेन-देन के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अधिकतर यूजर अपने पासवर्ड और दूसरे सुरक्षा पैमानों को लेकर विशेष सावधानी बरतते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी प्रमाणित करने की प्रक्रिया दो स्तरीय बना दी है, ताकि किसी तरह की ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचा जा सके। क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेन-देन को ऑनलाइन स्तर पर अधिक सुरक्षित बनाने की कोशिश की गई है। ऐसा ही कदम ऑफलाइन सेटअप में भी उठाया जा रहा है। कार्ड से लेन-देन के दौरान सुरक्षा को कड़ा करने के लिए बैंकिंग नियामक ने वर्किंग ग्रुप बनाया है। इसने अपने सुझावों से जुड़ी रिपोर्ट पेश भी कर दी है, जिसमें चिप कार्ड के मुद्दे से लेकर लेन-देन में अतिरिक्त पिन (निजी पहचान संख्या) को अनिवार्य करने पर बातचीत की गई है। हालांकि, ये सभी ऐसे कदम हैं, जिन पर बैंकों और नियामक को कदम उठाना है, लेकिन आप अपनी तरफ से भी कुछ सावधानी बरतकर बड़े नुकसान से बच सकते हैं।

आपने कितनी बार अपना कार्ड अपनी सीट पर रहते हुए होटेल के कर्मचारी को भुगतान करने के लिए दिया है? संभव है कि अक्सर ही आप ऐसा करते हों। निश्चित तौर पर यह बहुत आरामदायक स्थिति होती है और अक्सर होटेल कर्मचारी आपसे कार्ड लेकर भुगतान की जाने वाली रकम के लिए स्वाइप करता होगा और इसके बाद वह उसे वापस लौटा देता होगा। आप सोचते हैं कि जब तक आपने हस्ताक्षर नहीं कर दिया, तब तक भुगतान की पूरी श्रृंखला सुरक्षित तरीकों से गुजरी होगी। यह जरूरी नहीं है। मुमकिन है कि आपके कार्ड का कोई क्लोन बना लिया जाए। इसके लिए मैग्नेटिक स्ट्रिप पर दी गई सूचनाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। कई बार खो गए कार्ड या चोरी हुए कार्ड का इस्तेमाल खरीदारी के लिए किया जाता है।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के जनरल मैनेजर (रीटेल बैंकिंग प्रॉडक्ट्स) श्यामल सक्सेना का कहना है, ‘ मर्चेंट को कार्ड के पीछे किए गए आपके हस्ताक्षर से भुगतान की गई स्लिप पर किए गए हस्ताक्षर से मिलान करना चाहिए। अधिकतर मर्चेंट या तो ऐसा नहीं करते हैं या फिर कई बार हस्ताक्षर लगभग एक जैसे लगते हैं। ऐसे में, जब तक कार्ड के असली मालिक को पता चलेगा या वह जरूरी कदम उठाएगा तब तक चोरी गए कार्ड का इस्तेमाल करना बेहद आसान हो जाता है।’

भुगतान स्लिप पर बिना रकम की जांच किए हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए। सिटीबैंक इंडिया के बिजनेस हेड (क्रेडिट पेमेंट प्रॉडक्ट्स) संदीप भल्ला का कहना है, ‘सुनिश्चित करें कि कैशियर आपकी उपस्थिति में कार्ड स्वाइप करे। हस्ताक्षर करने से पहले भुगतान स्लिप पर रकम की जांच करें और उसे मासिक स्टेटमेंट आने तक सुरक्षित रखने की कोशिश करें।’

कई बार एटीएम पर कार्ड को स्वाइप करने के बाद एटीएम पिन पंच करने के दौरान कई लोग देख रहे होते हैं। इससे आपके कार्ड के खो जाने पर उसके दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में आपको कुछ विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सर्विसेज कंपनी एटॉस वर्ल्डलाइन इंडिया के समीर नीमावरकर का कहना है, ‘जब आप एटीएम या पीओएस पर पिन डाल रहे होते हैं, तो यह ध्यान रखना चाहिए कोई आपके द्वारा डाले जा रहे पिन को नहीं देख ले। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कहीं किसी व्यक्ति ने धोखा करने के उद्देश्य से कोई कैमरा तो नहीं लगा रखा है।’

बड़ी संख्या में यूजर अब अपने बिल का भुगतान और खरीदारी ऑनलाइन करने लगे हैं। उन्हें फिशिंग जैसी कई तरह की धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है। कई बार यूजर फर्जी बैंक या नियामक की ओर से भेजे गए ई-मेल के झांसे में आ जाते हैं और वह अपने कार्ड सहित दूसरी वित्तीय जानकारी साझा कर देते हैं। आपको यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि बैंक कभी भी इस तरह की सूचना की मांग ई-मेल से नहीं करता है। इस तरह की सूचनाओं को मांगे जाने पर सावधानी बरतें। फिर, बैंक साइट या किसी तरह के भुगतान के लिए खोली गई वेबसाइट के यूआरएल की ठीक तरह से जांच करें। अक्सर धोखाधड़ी करने वाले लोग एकसमान पोर्टल डिजाइन करते हैं।

आरबीआई वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, दो स्तरीय ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू करने से ऑनलाइन धोखाधड़ी में कमी आई है। अब ऑनलाइन लेन-देन करने पर एक अतिरिक्त पासवर्ड की जरूरत होती है। हालांकि, अगर आप बहुत आसानी से अपने पासवर्ड को किसी से साझा करेंगे, तो इसके खतरे भी बढ़ जाएंगे। आप हरसंभव प्रयास करें कि आपके कार्ड के सीवीवी, पिन और दूसरे पासवर्ड की जानकारी किसी को नहीं मिले।

लेन-देन के लिए किसी भी विदेशी वेबसाइट का चुनाव करते समय विशेष सावधानी बरतें। आप सुनिश्चित करें कि साइट असली और विश्वसनीय हो, क्योंकि जरूरी नहीं है कि हर बार दो स्तरीय ऑथेंटिकेशन हो ही।

इलेक्ट्रा-कार्ड सर्विसेज के सीनियर प्रॉडक्ट मैनेजर भाविन मोदी ने बताया, ‘आरबीआई द्वारा दो स्तरीय ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया सिर्फ भारत में काम करने वाले बैंकों पर लागू होती है। हालांकि, भारत में जारी किए जाने वाले डेबिट/क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल विदेशी वेबसाइट पर भुगतान करने के लिए किया जा सकता है। इस तरह की वेबसाइट पर आने वाले गेटवे भारत से बाहर के बैंक का भी हो सकता है और वह आरबीआई के तहत काम नहीं करता है। इसलिए, इस तरह की वेबसाइट पर लेन-देन करने के दौरान विशेष सावधानी बरतें। कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट और सीवीसी या सीवीवी नंबर डालते समय सावधान रहें। जरा सी चूक पर आपको तगड़ा वित्तीय नुकसान हो सकता है।’

गौरतलब है कि सीवीवी कार्ड के पीछे लिखा गया तीन अंकों वाला नंबर होता है। सीवीवी को सार्वजनिक होने से बचाएं। दो स्तरीय ऑथेंटिकेशन होने के बावजूद आप अपने सीवीवी को लेकर सावधानी बरतें, क्योंकि यह बहुत ही महत्वपूर्ण नंबर होता है। कई बार यूजर बिना सावधानी बरते क्रेडिट कार्ड के दोनों तरफ की फोटो स्टेट दे देते हैं। इलेक्ट्राकार्ड के मोदी का कहना है, ‘कार्डहोल्डर को अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड की कॉपी दाखिल करने से बचना चाहिए। किसी खास परिस्थिति में अगर दाखिल भी करना हो तो आप सिर्फ फ्रंट की फोटोस्टेट दाखिल करें। कभी भी सीवीसी या सीवीवी नंबर की फोटोस्टेट कॉपी दाखिल नहीं करें।’

यूजर कभी भी साइबर कैफे में अपने बिल का ऑनलाइन भुगतान नहीं करें। वहां सबसे अधिक जोखिम होता है। ऑनलाइन भुगतान करने के लिए पर्सनल कंप्यूटर का इस्तेमाल करें या फिर उस कंप्यूटर का इस्तेमाल करें जिस पर सिर्फ आप काम करते हों। सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर का इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है। उन जगहों पर पर्याप्त एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन नहीं होने की वजह से भी नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है।

प्लास्टिक कार्ड यूजर को बड़ी राहत देता है, लेकिन इसके साथ कई जिम्मेदारियां भी हैं। कभी भी संदिग्ध लेन-देन की बात पता चलने पर तत्काल बैंक को बताएं। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के सक्सेना का कहना है कि अधिकतर बैंक मोबाइल फोन या ई-मेल आईडी पर एलर्ट भेजते हैं। ऐसे में ग्राहकों को अपने ई-मेल आईडी और मोबाइल फोन नंबर को अपडेट करते रहना चाहिए। आप हमेशा अपने पास अपने बैंक के कस्टमर केयर का नंबर रखें, ताकि मुश्किल पड़ने पर वह आपके लिए मददगार साबित हो सके।

Source : इकनॉमिक टाइम्स

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